गोरखपुर में वीरता का नया एड्रेस — सेवन D में देखो गोरखा जवानों की कहानी!

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

गोरखा जवानों की वीरता अब सिर्फ इतिहास की किताबों में नहीं, बल्कि गोरखपुर के दिल में बसेगी!
उत्तर प्रदेश सरकार अब गोरखा सैनिकों की शौर्यगाथा को आम जनता के सामने लाने के लिए गोरखपुर में बना रही है — गोरखा युद्ध स्मारक संग्रहालय।

45 करोड़ की लागत से तैयार होगा हाई-टेक म्यूज़ियम

सिर्फ पत्थरों की दीवार नहीं, इस म्यूज़ियम में होंगी 7D थिएटर, लाइट एंड साउंड शो, वाटर बॉडीज़, डिजिटल म्यूरल्स और वीरता की झलकियां जो सीधा दिल को छू जाएंगी।

  • कुल अनुमानित लागत: ₹44.73 करोड़

  • निर्माण एजेंसी: उत्तर प्रदेश जलनिगम (C&D&S यूनिट 42)

  • लोकेशन: गोरखा रिक्रूटमेंट डिपो (GRD), गोरखपुर

4 सितंबर को होगा शिलान्यास, दो ‘कमांडर’ एक मंच पर

इस संग्रहालय का शिलान्यास करेंगे —

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

  • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान
    ये दिन होगा गोरखपुर और भारतीय सेना के लिए ऐतिहासिक।

पहली बार आम जनता देखेगी गोरखा वीरता की झलक

यह भारत का पहला गोरखा डेडिकेटेड संग्रहालय होगा, जहां गोरखा रेजिमेंट की 100+ साल की बहादुरी, मिशन, ऑपरेशन्स और मेडल्स को पब्लिक के लिए ओपन किया जाएगा।

यानी अब “गोरखा है तो डर कैसा?” का अनुभव 7D में मिलेगा!

1925 से अब तक का गौरव

इस परिसर में पहले से मौजूद गोरखा युद्ध स्मारक की स्थापना 1925 में की गई थी, प्रथम विश्वयुद्ध में गोरखाओं के शौर्य की याद में।
यहां स्थापित हैं 8 महावीरों की कांस्य प्रतिमाएं, जिनमें:

  • फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ

  • परमवीर चक्र विजेता कैप्टन जीएस सलारिया

  • कैप्टन मनोज पांडे

  • लेफ्टिनेंट कर्नल जेआर चिटनिस

  • नायक नर बहादुर, और अन्य

गोरखा: सिर्फ नाम नहीं, एक भरोसा है भारत की सीमा का

गोरखा जवानों ने ब्रिटिश राज से लेकर आज़ादी के बाद तक, हर बड़े युद्ध में भारत का मान बढ़ाया है।

  • अब तक 2700+ वीरता पुरस्कार

  • 40,000 से ज्यादा जवान आज भी सेवा में

  • UN शांति मिशन से लेकर कारगिल तक की हर बड़ी लड़ाई में अहम भूमिका

म्यूज़ियम नहीं, देशभक्ति का ‘सिनेमाघर’ होगा ये

यहां सिर्फ देखने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए आएंगे लोग।

  • लाइट एंड साउंड शो में युद्ध की कहानियां

  • सेवन डी थिएटर में ‘रियल टाइम एक्सपीरियंस’

  • इंटरएक्टिव म्यूरल्स और डिजिटल टचपॉइंट्स

अब देशभक्ति सिर्फ 26 जनवरी तक सीमित नहीं रहेगी!

यह स्मारक नहीं, ‘गौरव’ का गढ़ है

गोरखा संग्रहालय केवल पत्थरों की इमारत नहीं — यह गोरखाओं की तलवार, त्याग और तिरंगे से न निभाई गई कसमों की झलक होगी।
सिर्फ यूपी ही नहीं, पूरे भारत को इस पर गर्व होगा।

“देशभक्ति पढ़ाने की नहीं, दिखाने की ज़रूरत है — और गोरखपुर अब ये करने वाला है।”

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